अगर आप जीवन में बार बार अपमानित हो रहे है ? तो माँ बांग्ला मुखी यंत्र धारण करिये !

नमस्कार दोस्तों जय गुरु देव! नमो निखिलं ! दोस्तों अक्षर कुछ लोग जीवन में बार बार अपमान का सामना करते रहते है !या ये कहे वो किसी के लिए कितना भी कुछ करले उनको यस नहीं मिल पाता है ,कभी बोस की डांट,कभी पति पत्नी से त्रिष्कार ,कभी दोस्तों में अपमान ! कई बार तो हालात इतने खराब हो जाते है ,इंसान जहाँ भी जाता है उसको अपमान का सामना करना परता है !ऐसे में इंसान इतना दुखी हो जाता है वो या तो आत्महत्या कर लेता है या आत्महत्या के लिए सोचने लगता है ,ऐसे में इस समस्या का एक मात्र समाधान है ऐसे जातक को माँ बांग्ला मुखी साधना सम्पन करनी चाहिए ! और माँ बंगला मुखी यंत्र तैयार करके ये यंत्र अपने शरीर पर धारण करना चाहिए !जिसने भी माँ बांग्ला मुखी यंत्र धारण किया जीवन में उसको कोई भी परास्त नहीं कर सकता !माँ बांग्ला मुखी सच में शत्रु हन्ता है ! मैंने खुदने काफी राजनेताओ ,कारोबारियों ,फिल्मजगत के लोगो को ये यंत्र धारण करवाए है ! जिसका परिणाम सच में सार्थक आया है ! इस लिए मै आज आपके लिए माँ बांग्ला मुखी यंत्र तैयार व् साधना सम्पन करने की सम्पूर्ण विधि लेकर आया हु !
गृहस्थ भाइयों के लिए माता की आराधना का सरल उपाय प्रस्तुत है। आप इसे करके शीघ्र फल प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी देवी-देवता का अनुष्ठान (साधना) आरम्भ करने बैठे तो सर्वप्रथम शुभ मुर्हूत, शुभ दिन, शुभ स्थान, स्वच्छ वस्त्र, नए ताम्र पूजा पात्र, बिना किसी छल कपट के शांत चित्त, भोले भाव से यथाशक्ति यथा सामग्री, ब्रह्मचर्य के पालन की प्रतिज्ञा कर यह साधना आरम्भ कर सकते हैं। याद रहे अगर आप अति निर्धन हो तो केवल पीले पुष्प, पीले वस्त्र, हल्दी की 108 दाने की माला और दीप जलाकर माता की प्रतिमा, यंत्र आदि रखकर शुद्ध आसन कम्बल, कुशा या
मृगचर्य जो भी हो उस पर बैठकर माता की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माता बगलामुखी की आराधना के लिए जब सामग्री आदि इकट्ठा करके शुद्ध आसन पर बैठें (उत्तर मुख) तो दो बातों का ध्यान रखें, पहला तो यह कि सिद्धासन या पद्मासन हो, जप करते समय पैर के तलुओं और गुह्य स्थानों को न छुएं शरीर गला और सिर सम स्थित होना चाहिए। इसके पश्चात गंगाजल से छिड़काव कर (स्वयं पर) यह मंत्र पढें-
अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाङ्गतोऽपिवा, य: स्मरेत, पुण्डरी काक्षं स बाह्य अभ्यांतर: शुचि:।
उसके बाद इस मंत्र से दाहिने हाथ से आचमन करें-ॐ केशवाय नम:, ॐ नारायणाय नम:, ॐ माधवाय नम:। अन्त में ॐ हृषीकेशाय नम: कहके हाथ धो लेना चाहिए।
इसके बाद गायत्री मंत्र पढ़ते हुए तीन बार प्राणायाम करें।
चोटी बांधे और तिलक लगाएं। अब पूजा दीप प्रज्जवलित करें। फिर विघ्नविनाशक गणपति का ध्यान करें। याद रहे ध्यान अथवा मंत्र संबंधित देवी-देवता का संपर्क नंबर है।

जैसे ही आप मंत्र का उच्चारण करते हैं, उस देवी-देवता के पास आपकी पुकार तुरंत पहुंचती है।। इसलिए मंत्र शुद्ध पढ़ना चाहिए। मंत्र का शुद्ध उच्चारण न होने पर कोई फल नहीं मिलेगा, बल्कि नुकसान ही होगा। इसीलिए उच्चारण पर विशेष ध्यान रखें। अब आप गणेश जी के बाद सभी देवी-देवादि कुल, वास्तु, नवग्रह और ईष्ट देवी-देवतादि को प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हुए कष्ट का निवारण कर शत्रुओं का संहार करने वाली वाल्गा (बंगलामुखी) का विनियोग मंत्र दाहिने हाथ में जल लेकर पढ़ें-ॐ अस्य श्री बगलामुखी मंत्रस्य नारद ऋषि: त्रिष्टुप्छन्द: बगलामुखी देवता, ह्लींबीजम् स्वाहा शक्ति: ममाभीष्ट सिध्यर्थे जपे विनियोग: (जल नीचे गिरा दें)। अब माता का ध्यान करें, याद रहे सारी पूजा में हल्दी और पीला पुष्प अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

ध्यान-
मध्ये सुधाब्धि मणि मण्डप रत्न वेद्यां,
सिंहासनो परिगतां परिपीत वर्णाम,
पीताम्बरा भरण माल्य विभूषिताड्गीं
देवीं भजामि धृत मुद्गर वैरिजिह्वाम
जिह्वाग्र मादाय करेण देवीं,
वामेन शत्रून परिपीडयन्तीम,
गदाभिघातेन च दक्षिणेन,
पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि॥
अपने हाथ में पीले पुष्प लेकर उपरोक्त ध्यान का शुद्ध उच्चारण करते हुए माता का ध्यान करें।
उसके बाद आव्हान करना चाहिए ,आव्हान के बाद माता रानी को आसान देना चाहिए ,आशन के बाद पधाम उसके बादअरध्य ,इसके बाद आचमन ,आचमन के बाद स्नान स्नान पहले सुध जल से उसके बाद  पंचामृत से स्नान करवाना चाहिए ,उसके बाद माता रानी को वस्त्र समर्पित करे ! इसके बाद गंध अर्पित करे ,उसके बाद सौभाग्य सूत्र समर्पित करे ,उसके बाद अक्षत ,हरिद्रा ,कुंकुम ,और उसके बाद सिंदूर समर्पित करना चाहिए ,सिंधुर के बाद काजल व् आभूषण समर्पित करे ,उसके बाद पुष्प ,पुष्प के बाद पुष्प माला अर्पित करे ! इसके बाद धुप दिखाए  और उसके बाद दीप जलाये ! उसके बाद फल मिठाई मेवा चढ़ाये !उसके बाद ताम्बूल अंत में मुख सुधि के के लिए जल समर्पित करे !उसके बाद द्रव्य और उसके बाद पुष्पांजलि समर्पित करे ! अंत में दक्षिणा का विधान है !उसके बाद  यह मंत्र जाप करें।
मंत्र है :

ॐ ह्रीं
बगलामुखी! सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

इस मंत्र का जाप पीली हल्दी की गांठ की माता से करें। आप चाहें तो इसी मंत्र से माता की षोड्शोपचार विधि से पूजा भी कर सकते हैं।
आपको कम से कम पांच बातें पूजा में अवश्य ध्यान रखनी है-1. ब्रह्मचर्य, 2. शुद्ध और स्वच्छ आसन 3. गणेश नमस्कार और घी का दीपक 4. ध्यान और शुद्ध मंत्र का उच्चारण 5. पीले वस्त्र पहनना और पीली हल्दी की माला से जाप करना।

तिल और चावल में दूध मिलाकर माता का हवन करने से श्री प्राप्ति होती है और दरिद्रता दूर भागती है।

गूगल और तिल से हवन करने से कारागार से मुक्ति मिलती है।

अगर वशीकरण करना हो तो उत्तर की ओर मुख करके और धन प्राप्ति के लिए पश्चिम की ओर मुख करके हवन करना चाहिए।
इसके बाद यंत्र पूजन करना चाहिए ! इसमें सबसे पहले मूल मन्त्र
ॐ ह्रीं
बगलामुखी! सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय स्तम्भय जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।
का जप करना चाहिए !उसके बाद विनियोग ,उसके बाद ऋष्यादिनाश ,कर न्यास ,हृदयन्यासः ,मंत्राक्षर न्यास ,उसके बाद माँ का ध्यान  उसके बाद मानसोपचार पूजन करना चाहिए !फिर पीठ पूजन ,फिर नव शक्ति पूजन ,उसके बाद यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए !उसके बाद आवरण पूजा करनी चाहिए ! उसके बाद स्रोत्र करना चाहिए ! इस पूजन में कवच सर्व प्रथम करना चाहिए !
सम्पूर्ण विधि से तैयार यंत्र धारण करने से आपको मनवांछित परिणाम अवश्य प्राप्त होंगे !
PAALMIST RATAAN 8107958677,9351497829

One Reply on “अगर आप जीवन में बार बार अपमानित हो रहे है ? तो माँ बांग्ला मुखी यंत्र धारण करिये !”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *