Monday, 25 December 2017

हस्त रेखा विज्ञानं का इतिहास

हस्त रेखा विज्ञानं के इतिहास की अगर बात की जाये तो ये बहुत ही प्राचीन है !हस्त रेखा विज्ञानं समुंदर ऋषि दवारा रचित समुंदर शास्त्र का अभिन्न अंग है,मनुष्य का हाथ तो इंसान की ऐसी कुंडली है जो कभी भी नस्ट नहीं हो सकती,जिसे खुद भगवान बह्रमा जी ने अपने हाथो से बनाया है !बह्रमा जी द्वारा निर्मित इस जन्म पत्रिका में कोई भी गणितीय त्रुटि की कोई सम्भवना नहीं हो सकती, चराचर इस जगत में हस्त रेखा विज्ञानं से भड़ कर कोई ज्ञान नहीं हो सकता !ये गुड संकेतो से से निर्मित बह्रमा जी वो विद्या है ,जो जीवन भर इंसान का मार्गदर्शन करती है!पौराणिक ग्रन्थ रामचरित्र मानष में एक प्रसंग आटा है जब हिमाचल नरेश हिमालय की पुत्री जब विवाह योग्य हो गयी तो उन्होंने देवी मुनि नारद जी को बुलाया ,और उनसे अपनी पुत्री के होने वाले वर के बारे में पूछा , तो देव मुनि ने कन्या का हाथ देख कर बताया ,( रतन बबेरवाल 8107958677 )
जोगी जटिल ,अकाम मन नग्न अमंगल भेष
ऐश स्वामी एही  कहँ, मिलहि परिहस्त रेख !!
हे पर्वत राज इस कन्या के हाथो की रेखाएं बताती है,इस कन्या का पति वैरागी होते हुए भी तीनो लोको का स्वामी होगा,सवयं अमंगलकारी भेष भूषा का धारण करने के बावजूद पूरी दुनिया का मंगल करने वाला होगा ,जटा धारी काम देव के वश में रखने वाले महादेव होंगे!
,( रतन बबेरवाल 8107958677 )
हस्त रेखा देखने की परिपाटी सर्वप्रथम भारत में ही प्रारम्भ हुयी !कस्यप मुनि के अनुसार ज्योतष की सुरवात १८ आचार्यो दुवारा मानी जाती है जिनके नाम सूर्य ,पितामह ,व्यास वसिष्ठ,अत्रि ,पराशर,कस्यप,नारद ,गर्ग,मरीचि,मनु,अंगिरा,लोमेश,पोलिश,च्यवन ,एवं,भृंग,शोनक थे !ऐसी प्रकार हस्त रेखा के कोण कोण से विद्वान् हुए इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती ! लेकिन हम वेदो के सबसे प्राचीन ग्रंथ मानते है जिसमे अथर्वेद में ७.५२.८ में एक श्लोक है!,( रतन बबेरवाल 8107958677 )
कृतं दखिणे-हस्ते ,जयोमें स्वय आहितः !
अर्थार्त मेरे दाये हाथ में वर्तमान और बाये हाथ में भूत कल है !
इसका मतलब ये विज्ञानं अति प्राचीन है !,( रतन बबेरवाल 8107958677 )
वैसे बाइबल में भी ओल्ड टेस्टमेंट में लिखा है ,
ेस्वेर ने हमरे हाथो में इस लिए चिन्ह बनाये है जिससे इंसान अपने आप को पहचान सके !

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