Wednesday, 27 December 2017

हस्त रेखा विज्ञानं के प्रचार में देसी और विदेशी विद्द्वानो का सहयोग

दोस्तों नमस्कार ! जैसे पूर्व में हमने पढ़ा की हस्त रेखा विज्ञानं अति प्रचीनतम है ,जिसका उदय भारत में हुवा जिसके ले हमने कुछ पौराणिक संधर्भो का हवाला दिया जैसे हिमालय कन्या गिरिजा का देव मुनि नारद जी द्वारा हाथ देखे जाना ,या अथवृवेद -७.५२.८ में ये उल्लेख मिलना की दया हाथ वर्तमान को बताता है ,और बाया पिछले जन्म की कर्मो को बताता है,इसका मतलब हस्त रेखा विज्ञानं का हिंदुस्तान में बर्षो पहले उदय हुवा जिसका बाद में विदेशो में भी प्रचार हुवा ! अगर विदेश की बात की जाये ईशा के जन्म से करीब ४०० वर्ष पूर्व अरिस्टोटल नाम के ग्रीक विद्वान् पैदा हुए ,उनके सहयोग को हस्तरेखा शास्त्र कभी नहीं भुला पायेगा !उन्होंने chyromantia aristotelis cum finger और de coeioet mundicausa नमक दो ग्रंथो की रचना की जो १५३९ में छपे ,उसके बाद नाम आता हैंहिप्पोक्रेट्स ये भी ईशा से ४६० से ४४० सालपहले पैदा हुए इन्होने phthisiciugues  adunci ये बुक १९४७ में छपी जो आज भी उपलब्द है,ये पुस्तक जर्मन भासा में छपी गयी !इसके बाद अल्बर्ट मेघनेश नाम के विद्वान् हुए उन्होंने १२०५ से १२८० के बीच geheime  cheiromant bel  ustigungen नमक ग्रंथ की रचना की जिसका प्रकाशन १८०७ में हुवा !इनके आलावा बहुत से विदेशी विद्वानों ने हस्त रेखा विज्ञानं के प्रचार में सहयोग किया जिनके नाम मुख्य तोर पर ये कहे जा सकते है, पोइलिमन,अलतूनिया, पिलिनी,हीसपंष, अग्रीपा कर्नेलिप्सः ,कोर्वस अनड्रेस ,रिचर्ड सौंदर्य,जॉर्ज विलियम ,प्रो.cheiro जैसे नाम मने जाते है!
धन्यवाद 

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