Thursday, 28 December 2017

हस्त रेखा विज्ञानं के प्रचार में भारतीय विद्वानों का सहयोग !

हस्त रेखा विज्ञानं के इतिहास के बारे में अलग अलग विद्वानों का अलग अलग मत है !कुछ विदेशी विद्वानों का मत है चीन में इसका विकाश क्रैएस्त के जन्म से ३००० साल पहले हो चूका था,और आज चीन के कोने कोने में इसका प्रचार दिखाई परता है !परन्तु ग्रीक साहित्ये में इसकी खोज चीन से पहले ही मिलती है !लेकिन दुनिया में सबसे पौराणिक सभ्यता भारतीय सभ्यता है ,और  दुनिया की सभी विद्यावो का मूल स्थान भारत ही है ,पुरातन युग में जब आर्य महर्षियो ने इस विद्या को जन्म दिया तब विश्व में कहि भी ग्रीक मिस्र या पारष जैसी सभ्यता को कोई नहीं जनता था ,जैसे जैसे समय गुजरा ये विद्या विदेशो में गयी झा इसको विशेष सम्मान  मिला !लेकिन बात ये आती है की भारत के वो कोनसे विद्वान् थे जिन्होंने इस विद्या का प्रचार देश विदेश में किया?
इनमे सबसे ऊपर जो नाम आता है वही समुंदर ऋषि : ये परथतम पहले ऐसे ऋषि थे जिन्होंने सम्पूर्ण रूप से इस विद्या को ग्रंथ का रूप दिया आवर वो दुनिया में समुंदर शास्त्र के नाम से विख्यात हुवा !उनके बाद नारद जी, वराह ,माण्डल्य,सन्मुख ,राजा भोज,आदि कवी बाल्मीकि,महर्षि बाल्मीकि ,महर्षि पराशर .महृषि वराहमिहिर ,ड़ॉ भोज राज दिवेदी जी, सद्गुरु डॉ नारायण दत्त श्रीमाली जी इन सब ने हस्त रेखा के प्रचार में विशेष सहयोग दिया है जिसे इतिहास कभी भी भूल नहीं सकता !

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