Monday, 1 January 2018

माँ बांग्ला मुखी साधना

नमस्कार दोस्तों ,जय गुरु देव , जय माँ बांग्ला मुखी जी, दोस्तों आज नया साल है हर कोई चाहता है वो दिन प्रति दिन नै ऊंचाइयों को छुए ,लेकिन कैसे ? ये बहुत काम लोग जानते है !इस लिए आज मै आपके लिए  लाया हु कुछ ऐसी जानकारी जो आपके लिए जीवन में बहुत उपयोगी होने वाली है ! दोस्तों वैसे तो सफलता का एक ही रास्ता है कड़ी मेहनत ,लेकिन जब तक भाग्ये साथ नहीं देता तब तक मेहनत करने से भी कोई विशेष लाभ नहीं मिल पता है ,और भाग्ये  को अनुकूल बनने और अपने आप को सर्व श्रेष्ठ बनाने के लिए माँ बांग्ला मुखी साधना सबसे उत्तम मानी गयी है ! धन प्राप्ति ,ानिस्ट ग्रहो की शांति,वशीकरण,उच्चाटन ,मारण,मोहन ,मुकदमे में विजय प्राप्ति ,मनचाहे व्यक्ति से मिलान हेतु,और अपने आप को अपने छेत्र में सर्वश्रेष्ठ बनाने हेतु ,राजनैतिक सफलता हेतु, तांत्रिक क्रियाओ को नस्ट करने हेतु  !माँ बांग्ला मुखी साधना सर्वश्रेष्ठ साधना है !माँ बांग्ला मुखी को हम पूजा अर्चना अथवा साधना से खुस कर उनकी दया के पात्र बन सकते है !इस साधना में विशेष सावधानियाँ रखने की आवश्यकता होती है जिसे हम यहाँ पर देना उचित समझते हैं। इस साधना को करने वाला साधक पूर्ण रूप से शुद्ध होकर (तन, मन, वचन) एक निश्चित समय पर पीले वस्त्र पहनकर व पीला आसन बिछाकर, पीले पुष्पों का प्रयोग कर, पीली (हल्दी) की 108 दानों की माला द्वारा मंत्रों का सही उच्चारण करते हुए कम से कम 11 माला का नित्य जाप 21 दिनों तक या कार्यसिद्ध होने तक करे या फिर नित्य 108 बार मंत्र जाप करने से भी आपको अभीष्ट सिद्ध की प्राप्ति होगी।

ऊँ ह्मीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्मीं ऊँ स्वाहा।
हमने उपर्युक्त सभी बारीकियाँ बता दी हैं। अब यहाँ पर हम इसकी संपूर्ण विधि बता रहे हैं। इस छत्तीस अक्षर के मंत्र का विनियोग ऋयादिन्यास, करन्यास, हृदयाविन्यास व मंत्र इस प्रकार है--

विनियोग
ऊँ अस्य श्री बगलामुखी मंत्रस्य नारद ऋषि:
त्रिष्टुपछंद: श्री बगलामुखी देवता ह्मीं बीजंस्वाहा शक्ति: प्रणव: कीलकं ममाभीष्ट सिद्धयार्थे जपे विनियोग:।

ऋष्यादि न्यास-नारद ऋषये नम: शिरसि, त्रिष्टुय छंद से नम: मुखे, बगलामुख्यै नम:, ह्मदि, ह्मीं बीजाय नम: गुहेय, स्वाहा शक्तये नम:, पादयो, प्रणव: कीलक्षम नम: सर्वांगे।

हृदयादि न्यास
ऊँ ह्मीं हृदयाय नम: बगलामुखी शिरसे स्वाहा, सर्वदुष्टानां शिरवायै वषट्, वाचं मुखं वदं स्तम्भ्य कवचाय हु, जिह्वां भीलय नेत्रत्रयास वैषट् बुद्धिं विनाशय ह्मीं ऊँ स्वाहा अष्टाय फट्।

ध्यान
मध्ये सुधाब्धि मणि मंडप रत्नवेघां
सिंहासनो परिगतां परिपीत वर्णाम्।
पीताम्बरा भरणमाल्य विभूषितांगी
देवीं भजामि घृत मुदग्र वैरिजिह्माम ।।
उसके बाद गुरु पूजन श्री गणेश पूजन ,आवर छेत्रपाल पूजन करने के बाद मूल मंत्र की माला करे ! जितनी माला की जाती है उसका दसवा भाग हवं करना है , हवं में सिर्फ आम की लकड़ी काम में लेनी चाहिए,जिसमे चने की दाल आवर टिल से हवन किया जाता है ! वैसे अलग अलग प्रयोजन के लिए अलग अलग वस्तुवो से हवन किया जाता है ! जैसे वशीकरण के लिए सरसु व् गाय का घी  से हवं किया जाता है,धन प्राप्ति के लिए दूध ,टिल,चावल, सहद ,सुध गाय का घी से हवन किया जाता है,संतान के लिए,अशोक व् करवीर के पात्र,सत्रु विजय के लिए सेमर के फूल से हवं होता है, कारागार से मुक्ति के लिए गूगल और तिल से हवं होता है !रोग मुकति के लिए कुम्हार के चक की मिटी ,चार चार उंगल की रेन्ड की लकड़ी ,घी सककर उक्त लजा द्वारा हवं होता है ! आकर्षण के लिए बितेस्वर ( बलिस्त ) की योनि उक्त तीन मेखला से सुशोभित सूंदर कुंड की रचना करके कुश कंडिका आदि के साथ विधिपूर्वक अंधु, घी, सककर मिश्रित नामक से हवं करना चाहिए !
धन्यवाद
( चूँकि माँ बंगला मुखी साधना तांत्रिक साधना है इस लिए योग्ये गुरु के दिशा निर्देश से ही साधना करे !)
रतन बबेरवाल हस्त रेखा विध व् माँ बंगला मुखी साधक
8107958677

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