Tuesday, 5 June 2018

हस्त रेखा विज्ञान - गुरु पर्वत

नमस्कार दोस्तो।जै गुरु देव।दोस्तो आज हम बात करेंगे गुरु पर्वत की।किसी भी हाथ मे गुरु पर्वत तर्जनी उंगली के नीचे के छेत्र को गुरु पर्वत कहा जाता है। अगर गुरु पर्वत बहुत ज्यादा विकसित है तो जातक सवार्थी, घमंडी,जूठी शान के लिये खर्च करने वाला,अबुद्धि,ईर्ष्यालु, क्रोधी,ठग,कपटी,क्रूर,अविस्सनिय,अपनी प्रसंशा सुनने वाला,तानासाही, अन्धविस्वशि होता है।अगर गुरु पर्वत केवल विकसित है तो जातक सांसारिक, बुद्धिमान, धार्मिक, किसी पर अन्याय बर्दास्त न करने वाला,समाज सेवी,नेतृत्व करने वाला,सवाभिमानी,लेखक,विद्वान,परोपकारी,धर्यवान, उच्च अधिकारी,राजनेता,न्यायाधीश, देश भक्त,व्यापारी,होता है।
अगर गुरु पर्वत अल्प विकसित है यानी समतल तो जातक दुराचारी,सवार्थी,शंकालु,चिड़चिड़ापन, धर्म मे काम आस्था,हंसःमुख,भाषणकला में निपुण,सवाभिमानी।
अगर गुरु पर्वत दबा हुआ हो तो आत्मसम्मान बिल्कुल नही।दुसरो को खुशामद करने वाला,माता पिता के सुख की कमी,नास्तिक,बुद्धिहीन, निम्न कोटि के मित्रो वाला। ऐसे जातक भूगोलज्ञ,साहित्यकार,कलाकार हो सकते है।इनको गठिया, हार्ट ,या पीलिया जैसे रोगों का सामना करना पर सकता है। इसके अलावा हमे पर्वतो के जुकाँव का भी अध्यन करना चाहिए।
अगर गुरु पर्वत का झुकाव शनि की तरफ हो तो जातक चिंतनशील,संघर्ष में निराश होने वाला,शांत, उपकारी, साहित्य निर्माता,अलौकि विद्या को जानने वाला।होता है। अगर गुरु अपने स्थान पर है तो जातक खाने का सौकीन, व्यपार में सफल,राजनीतिक,धार्मिक,लेखकहोता है। केकिन हार्ट व लिवर की बीमारी से पीड़ित होगा। ये मोटापे से भी परेशान हो सकते है।
धन्यवाद
अगर आप हस्त रेखा विज्ञान का अध्यन करना चाहते है या अपना हाथ दिखाना चाहते है तो संपर्क करे। 

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