Saturday, 2 March 2019

हाथ देखने का सम्पूर्ण सही तरीका !

दोस्तों नमस्कार जय गुरु देव , नमो निखिलं ! दोस्तों हस्त रेखा विज्ञानं का विशेष महत्व है ,लेकिन अधूरे ज्ञान की वजह से हस्त रेखा शास्त्र का महत्व कमआँका जाने लगा है !इस लिए आज का ये लेख ऐसी विषय को लेकर है की किसी हाथ का सम्पूर्ण अध्यनकैसे करे !
दोस्तों हाथ देखने के लिए सबसे पहले हमें हाथ के आकार का अध्यन करना चाहिए !
हाथ का आकार मुख्य रूप से ५ प्रकार का होता है !
१ बहुत बड़ा हाथ ( ऐसा जातक या तो मजदूर किस्म का इंसान होता है या ऐसा इंसान दूसरे के दिमाग से चलता है )
२ बड़ा हाथ ( ऐसे लोग ज्यादातर शासन करने वाले धनी मानी लोग होते है !)
३ सामान्य हाथ (  ऐसे लोग पूर्ण रूप से धार्मिक व् सामाजिक किस्म के लोग होते है )

४ छोटा हाथ ( ऐसे लोग स्वार्थी किस्म के लोग होते है )
५ बहुत छोटा हाथ ( ऐसे लोग विस्वाश के काबिल इंसान नहीं होते है ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए किसी की हत्या भी कर सकते है या करवा सकते है )
उसके बाद हाथ की प्रकर्ति का अध्यन किया जाता है ! हाथ की प्रकर्ति मुख्य रूप से ४ प्रकार की होती है !
१ नरम हाथ ( ऐसे लोग भावनात्मक किस्म के इंसान होते है )
२ बहुत ज्यादा नरम हाथ ( ऐसे लोग आलसी किस्म के इंसान होते है लेकिन जीवन में सभी प्रकार के सुखो का भोग भी करते है !)
३ सख्त हाथ ( ऐसे लोग मेहनती और ईमानदार इंसान होते है !)
४ अति सख्त हाथ ( ऐसे इंसान मजदूर किस्म के इंसान होते है ,ऐसे लोग दूसरे के दिमाग से संचालित होते है !)
इसके बाद हाथो के रंग का अध्यन करना चाहिए !
हाथो के मुख्य रूप से ४ प्रकार के रंग होते है !
१ गुलाबी हाथ ( ऐसे लोग जीवन में पूर्ण सुख का लाभ प्राप्त करते है ऐसे लोग सामजिक रूप से सम्मानित इंसान होते है !)
२ पीला रंग  ( ऐसे लोग चिडचिड़े किस्म के रोगी लोग होते है !)
३ लाल रंग ( लाल रंग इंसान में उत्तेजना को दर्शाता है )
४ अति लाल रंग ( ऐसे लोग बहुत ज्यादा ग़ुस्से वाले होते है )
रंगो के बाद त्वचा का अध्यन करना चाहिए !
त्वचा दो प्रकार की होती है !
१ रूखी त्वचा ( ऐसे जातक हार्डवर्कर होते है .इनको जीवन में जो भी मिलता है बड़ी कठिनाई से मिलता है !)
२ चिकनी त्वचा  ( चिकनी त्वचा का मतलब जीवन में सफलता की परिचायक है )
ऐसे जातक जीवन सभी प्रकार के सुखो का भोग प्राप्त करते है !
इसके बाद हमें हाथो के प्रकार का अध्ययन करना चाहिए ! हाथ मुख्य रूप से ८ प्रकार के होते है !
१ प्रारम्भिक हाथ  ( ऐसे जातक संस्कारी ,सामाजिक ,नीतिज्ञ ,और साशन कर्ता होते है )
२ समकोण हाथ  ( ऐसे जातक सामाजिक और धार्मिक होते है )
३ चमसाकार हाथ ( ऐसे जातक शोधकर्ता होते है )
४ कलात्मक  हाथ  ( ऐसे जातक कलाकार होते है )
५ आदर्शवादी हाथ ( ऐसे लोग शोधकर्ता होते है ये विचारो के पक्के होते है )
६ दार्शनिक हाथ ( ऐसे लोग हद से ज्यादा सोचने वाले होते है )
७ कोणिक हाथ ( ऐसे लोग बहुत ज्यादा बुदिमान किस्म के इंसान होते है )
८ मिश्रित हाथ  ( मिश्रित हाथ में सभी प्रकार के हाथो के गुण पाए जाते है !)
हाथो के प्रकारो के अध्यन के बाद अंगुलियों का अध्यन करना चाहिए ! अंगुलिया मुख्य रूप से ४ प्रकार की होती है !
१ नोकदार अंगुलिया
२ समकोण अंगुलिया
३ कोणिक अंगुलिया
४ चमसाकार अंगुलिया
अंगुलियों के बाद अंगूठे का भी विस्तृत अध्यन आवश्यक है !क्यूंकि हाथ में सिर्फ अंगूठे का विस्तृत अध्यन करके हम जातक के बारे में ७०% जानकारी प्राप्त कर सकते है !अगर बात की जाये अंगूठे की तो अंगूठे भी ५ प्रकार के होते है !
१ समकोण श्रेणी के अंगूठे ( ऐसे जातक पूर्ण रूप से सामाजिक और धार्मिक होते है !)
२ नोकदार अंगूठा ( ऐसे जातक शुक्र ग्रह से प्रभावित इंसान होते है ऐसे जातक ज्यादातर कलाकार होते है !)
३ कोणिक अंगूठा ( ऐसे लोग बुद्धिमान किस्म के इंसान होते है )
४ आयताकार अंगूठा ( ऐसे लोग जीवन में भौतिक सुखो को विशेष महत्व देते है ! ऐसे लोग दूसरे लोगो के दिमाग से संचालित होते है !)
५ चमसाकार अंगूठा  ( ऐसे जातक शोधकर्ता होते है ,इनको जीवन के सुरुवात के संघर्ष का सामना करना परता है !)
अंगूठे के अध्यन के बाद नाखुनो का भी विस्तृत अध्यन करना चाहिए !
नाख़ून भी मुख्य रूप से ५ प्रकार के होते है !
१ वर्गात्मक नाख़ून २ आयताकार नाख़ून ३ चमसाकार नाख़ून ४ कोणिक नाख़ून ५ नोकदार नाख़ून !
नाखुनो के अध्यन के बाद हमें ग्रहो का विस्तृत अध्यन करना चाहिए ! मुख्य ग्रह ९ होते है ,लेकिन हाथ में १२ ग्रहो का ाद्यान किया जाता है !जो की निम्नांकित है !
१ सूर्य ग्रह
२ चन्द्रमा ग्रह
३ गुरु ग्रह
४ चंद्र ग्रह
५ शनि ग्रह
६ शुक्र ग्रह
७ बुध ग्रह
८ राहु ग्रह
९ केतु ग्रह
१० प्लेटो ग्रह
११ नेप्चून ग्रह
१२ हर्सल ग्रह
इसके आलावा हाथ में मंगल पर्वत दो जगह देखा जाता है जिसे हम उच्च मंगल और निम्न मंगल के रूप में जानते है !
ग्रहो के अध्यन के बाद हमें रेखावो का अध्यन करना चाहिए ! हाथ में रेखा चार प्रकार की होती है !
१ मुख्य रेखाएं
२ लघु रेखाएं
३ सूक्षम रेखाएं
४ अति सूक्ष्म रेखाएं
अगर बात की जाये मुख्य रेखावो की तो इस श्रेणी में  १ जीवन रेखा २ मस्तिष्क रेखा ३ ह्रदय रेखा ४ भाग्य रेखा ५ विवाह रेखा ६ मणिबंद रेखा आती है !
उसके बाद बात करते है लघु रेखावो की ! इस श्रेणी में  १ सूर्य रेखा २ संतान रेखा ३ यात्रा रेखा स्वास्थ्य रेखा आदि आती है !
उसके बाद बात करते है सूक्ष्म रेखावो की इस श्रेणी में १ मंगल रेखा २ चंद्र रेखा ३ शुक्र रेखा ४ बुध रेखा ५ शुक्र वलय ६ गुरु वलय ७ शनि वलय ८ रवि वलय ९ प्रभावक और बाधक रेखा १० विद्या रेखा ११ विज्ञानं रेखा १२ भ्रात्र भगनी रेखा १३ मित्र और शत्रु रेखा १४ दुर्घटना रेखा आदि !
इसके बाद हमें अति सूक्ष्म रेखावो का अध्यन करना चाहिए ! अति सूक्ष्म  रेखावो की श्रेणी में  १ तारा २ द्वीप ३ त्रिभुज ४ क्रॉस ५ जाल ६ त्रिसूल ७ वर्ग ८ व्रत ९ यव १० संख ११ स्वीप १२ तम्बू १३ तिल आदि आते है !इस प्रकार हाथ का अध्यन करने के बाद ही  जातक को विश्लेषण बताना चाहिए !

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